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एक लड़के ने मुझे प्यार में फंसाया

  • Writer: sheetal sahani
    sheetal sahani
  • Aug 18, 2020
  • 12 min read

हेल्लो दोस्तों, कैसे है आप सभी लोग?? आशा करती हूं कि अच्छे ही होंगे। मेरा नाम संजना है और मैं अबजलपूर गांव की रहने वाली हूँ। मैं गांव में रहने वाली एक सीधी साधी ओर अच्छे परिवार की लड़की हूँ। मेरा परिवार थोड़ा गरीब है लेकिन मुझे मेरे परिवार से काफी अच्छे संस्कार मिले है। पैसों की कमी के कारण मुझे केवल 8वी कक्षा तक ही पढ़ाया गया है। अभी मेरी उम्र करीब 19 के करीब हो चुकी है, लेकिन मेरे घर वाले अभी से ही मेरे लिए लड़का देखने लगे गए है, क्योंकि अब मेरी उभरती हुई जवानी पूरे गांव में मशहूर हो चुकी है। मैं दिखने में थोड़ी सावली हूँ लेकिन मेरा चेहरा किसी मॉडल की तरह लगता है। गांव के रहन सहन के कारण मेरा पहनावा इतना अच्छा नही यही, लेकिन मेरे फिगर की वजह से मैं हर कपड़े में हॉट लगती हूँ। मेरा शरीर एक दम टाइड ओर कटीला है, साथ ही मेरे बूब्स ओर गांड भी काफी उभरे हुए है जिससे कि मैं हर कपड़ों में खूबसूरत लगती हूँ। मेरी आँखों ओर बालों का रंग बिल्कुल भूरा है, लेकिन खेत मे काम करने की वजह से मेरे कपड़े बिल्कुल गंदे  रहते है। मेने आज तक किसी लड़के से बातचीत करना तो दूर, बल्कि किसी लड़के को छूआ तक नही है, लेकिन मेरी जिंदगी में एक दिन ऐसा जब मुझे एक लड़के ने बहुत चौदा था। यह कहानी आज से करीब 1 साल पहले की है जब हमारे ही पड़ोस में रहने वाली एक बूढ़ी दादी के यहां काफी सालों बाद उनका पौता रहने के लिए आया हुआ था। एक दिन अचानक ही मेरे घर से बाहर निकलते हुए मेरी नजर उस लड़के से जा मिली थी। वह लड़का 6 फिट के लंबे चौड़े कद वाला ओर आकर्षित दिखने वाला लड़का था। वह लड़का काफी लाजवाब था, ओर उसने अपने शरीर और बॉडी को काफी अच्छा बनाया हुआ था। उसके बाल बहुत लंबे और सुनहरे लग रहे थे, जब मैं उसे देख रही थी, तब भी वह अपने बालों पर अपने हाथ फेर रहा था। इतने लाजवाब ओर खूबसूरत शरीर वाले लड़कें को देख कर तो मेरी आंखे उस पर टिक ही गयी थी। तभी अचानक मेरी माँ अंदर से चिल्लाती है। “अरि ओ संजना कहाँ मर गई कुतिया, जो काम बोला था, वो हुआ भी या नही”। यह सुनकर मैं “आई माँ” कहते हुए शर्माते हुए अपने कमरे में चली गयी थी। वह लड़का हमारे बाहर के बिल्कुल नजदीक में ही रहता था, इसलिए कई बार मैं उसे चुपके से घूरा करती थी। उस लड़का कई बार मुझे ऐसे देखते हुए नोटिस कर चुका था, लेकिन वह मुझे देखने के बजाय ज्यादातर मेरे शरीर को ही घुरा  करता था। मुझे उसकी यह हरकत बिल्कुल भी अच्छी नही लगती थी, लेकिन जाहिर सी बात थी कि आखिर कोई शहर के रहन-सहन वाला लड़का एक गांव की लड़की से इससे ज्यादा अधिक ओर क्या चाहेगा? लेकिन मैं भी इतनी पागल थी कि उसके प्यार मैं जैसे पागल ही हो गयी थी। अक्सर पड़ोस वाली दादी के यहां मेरा आना-जाना लगा ही रहता था। इसलिए मेरी उस लड़के से थोड़ी बहुत बातचीत होने लग गयी थी। बातचीत के दौरान भी वह लड़का मेरे शरीर के अंगों को छूने का कोई भी मौका नही छोड़ता था, लेकिन प्यार की वजह से में इन सभी बातों को नजरअंदाज कर दिया करतीं थी। बातों ही बातों में मैने उस लड़के नाम भी पता कर लिया था, उस लड़के ने अपना नाम मुझे आशीष बताया था। आशीष बहुत ही पैसे वाला लड़का था और काम की वजह से तनाव के चलते वह अपनी दादी के घर यहां गांव में आया हुआ था। अब मैं घर से बाहर कहीं भी जाया करती थी, तो आशीष मेरा अक्सर पीछा किया करता था और मुझे उसका इस तरह से पीछा करना भी बहुत अच्छा लगने लगा था।एक दिन मुझे खेत मे काम करने जाना था और वहां बहुत ही मेहनत वाला काम था। मेने अपना दुप्पट्टा हटाकर एक पेड़ पर टांग दिया था। काम के दौरान मेरा पूरा शरीर पसीने से भीग चुका था। तभी मैं एक छाया वाले पेड़ के नीचे आकर कुछ देर के लिए खड़ी हो गयी थी। तभी अचानक से मैने एक लड़कें को अपनी तरफ आते हुए देखा, ये लड़का और नही बल्कि आशीष ही था। आशीष ने मेरी तरफ़ पानी की बोतल थमाते हुए कहा कि “ये लो तुम पानी पी लो, क्योंकि तुम बहुत थक गई होगी ना”। आशीष को अकेले में इतना करीब पाकर मेरे धड़कने बहुत तेजी से बढ़ने लगे गयी थी। साथ ही मेरी सांस तेज होने के साथ ही मेरा शरीर कांपते हुए एक दम ठंडा पढ़ने लग गया था। तभी मेने हिम्मत जुटाते हुए एक दम लड़खड़ाती हुई आवाज मैं कहाँ कि “ हां वो मैं थोड़ा थक गई थी, लेकिन आपको तकलीफ लेने की क्या जरूरत थी”। मेरे बस इतना कहते है आशीष ने मुझसे कहा कि “अरे इसमें तकलीफ की क्या बात है, ये करना तो मेरा फर्ज बनाता है। यह सुनकर मुझे अंदर ही अंदर काफी खुशी होने लगी थी, ओर मैं हल्की सी मुस्कान के साथ आशीष की आंखों में दिखते हुए खो सी गयी थी। अब मैं पानी पी रही थी, ओर आशीष का ध्यान में छाती की तरफ था। मुझे इतना पसीना आ रहा था कि पसीना मेरे गले से निकलकर मेरी बूब्स की दीवार से होते हुए सीधा मेरे बूब्स के अंदर घुस रहा था। उस पसीने की ठंडक को मैं आसानी से महसूस कर सकती थी। आशीष भी इस दृश्य को काफी ध्यान से देख रहा था, ओर मैं देख पा रही थी कि आशीष की पेंट में एक लंबा चौड़ा तंबू तन चुका था। तभी मेरी तिरछी नजर से देखने के कारण बोतल से पानी पानी निकल कर गलती से मेरे बूब्स पर ढुल जाता है। मैं तुरन्त अपने हाथ को अपने बूब्स पर मारकर पानी को झटकारने लगती हूँ और तभी इतना आकर्षक दृश्य देखकर आशीष का ध्यान इधर से उधर की ओर होने लगता है, जैसे कि उसकी सब्र की सभी सीमा अचानक से टूट ही गयी थी। कुछ देर बाद ही आशीष तुरंत ही मेरी तरफ देखता है और तुरन्त ही मेरे गले और बूब्स के बीच मे चूमने लग जाता है। वह बिल्कुल किसी भूखे भेड़िये की तरह मुझे गले ओर बूब्स पर चूमने लग जाता है। इस दौरान मैं भी वासना की प्यास में पूरी तरह से डूब चुकी थी। पता नही कैसे ओर अपने आप ही मेरी आँखें बंद हो गयी थी और मेरा पूरा शरीर आशीष के उन हर चुम्बन का मजे से आनन्द ले रहा था। आशीष के इस तरह से चूमने से मेरी चुत के साथ ही मेरा पूरा बदन ही टाइड हो गया था। आशीष ने कुछ ही देर में मुझे पूरी तरह से गर्म करके रख दिया था। मेरे बूब्स ओर गांड भी एकदम से टाइड होने लग गए थे, ओर मेरा चेहरा किसी चुदासी औरत की तरह दिखने लग गया था। अचानक से मुझे याद आता है कि इस समय हम किसी घर मे नही, बल्कि एक खेत मे मौजूद है। अचानक से मुझे होश आता है और मैं आशीष को धक्का देते हुए उसे खुद से पूरी तरह ही अलग कर देती हूं। आशीष ओर मैं जैसे ही एक दूसरे अलग होते है हम दोनों की सांस एक दम तेजी से चलने लगती है और हमारी आंखें एक दूसरे को ही घूरने लगती है। तभी अचानक से आशीष फिर से मेरे होंठ ओर होंठ रख के एक जोरदार चुम्बन मेरे होंठो पर रख देता है, ओर मेरे पसीने से भीगे होंठों का रस चूसने लग जाता है। हम एक बार फिर से एक दूसरे को चूमते हुए वासना में खो जाते है। इस दौरान हम दोनों की जीभ भी काफी बार टकरा जाती है। हम करीब 5 मिनट तक एक-दूसरे को ऐसे ही चूमते रहते है और फिर मैं फिर से आशीष को धक्का देते हुए खुद से दूर कर देती हूँ। आशीष काफी हैरानी से मेरी तरफ देखने लगता है। तभी मैं आशीष से कहती हूँ कि “देखो मैं कोई ऐसी वैसी लड़की नही हूँ, इसलिए मुझे यह सब पसन्द नही है। अब मैं यहां से जा रही हूँ और तुम अब मेरा पिछा कभी भी नही करोगे” मेने आशीष को ये  सब कह तो दिया था, लेकिन मन ही मन मुझे भी आशीष का इस तरह से चूमना काफी अच्छा लग रहा था। मेरे इतना कहने पर भी आशीष ने मेरा पीछा करना बंद नही किया था। एक दिन आशीष ने अचानक ही मुझे रास्ते पर रोक दिया और मुझे आई लव यू कहकर प्रपोज करने लगा, लेकिन मेने उसके प्रपोजल का कोई भी जवाब नही दिया था। तभी आशीष ने कहा कि “देखो मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ अगर तुम भी मुझसे प्यार करती हो तो कल नदी के पास वाले फार्म हाउस की तरफ आ जाना”। इतना कहते ही आशीष वहा से चला गया था। भले ही मेने आशीष को बताया नही हो, लेकिन मैं भी उससे बहुत ही प्यार करती थी। जबकि मुझे यह भी पता था कि आशीष का प्यार केवल जिस्म तक ही सीमित था। फिर भी मेने उसके प्यार में अंधा होकर नदी के पास में मौजूद फार्म हाउस पर आशीष से मिलने का फैसला कर लिया था। अगले दिन आशीष के कहे हुए अनुसार, मैं उससे मिलने के लिए फार्म हाउस पर पहुंच गई थी। वहां पहुचते ही पहले आशीष मुझे देखकर थोड़ा मुस्कुराया ओर फिर मुझसे कहने लगता कि “ मैं जानता था कि संजना तुम यहाँ पर जरूर आओगी।” बस इतना कहते ही उसने फार्म हाउस की चाबी निकाली और मुझे फार्म हाउस के अंदर आने के लिए कहने लगा। मुझे यकीन ही नही हो रहा था कि आशीष ने सिर्फ एक मुलाकात के लिए उस फार्म हाउस को किराए पर ले लिया था। कुछ देर बाद हम दोनों फार्म हाउस के अंदर मौजूद थे। पहले तो हम दोनों ने एक-दूसरे को जानने की कोशिश की ओर फिर हम दोनों एक दूसरे से बातें करने लग गए थे। मुझे कहीं ना कहीं यह शक हो रहा था कि शायद आशीष मेरे साथ सेक्स करना चाहता है, लेकिन मैं काफी हैरान थी कि आशीष ने अभी तक मेरे से इस विषय मे कोई भी बात नही की थी। आशीष को देखने से ही यह पता चल रहा था कि वह बहुत ही ज्यादा रोमांटिक मूड में है, क्योकि उसकी नजर लगातार मेरे जिस्म के हर एक हिस्से को टटोल रही थी। कुछ ही देर बार आशीष एक दूसरे कमरे में जाता है वहां से गिफ्ट का बक्सा उठाकर मेरे पास आता है, और मेरे हाथों में गिफ्ट थमाते हुए कहता है कि “ये लो ये मैं तुम्हारे लिए लेकर आया हूँ। मैने जैसे ही उस गिफ्ट को खोला तो देखा कि उसमें से व्हाइट एन्ड ब्लैक कलर की टॉप ओर स्लीवलेस स्कर्ट थी। मुझे ड्रेस देखकर काफी खुशी हुई थी, क्योकि मेने आज तक कंधों पर से नग्न रहने वाली स्लीवलेस ड्रेस ओर स्कर्ट नही पहनी थी। पहले तो कुछ देर आशीष ने मेरे शरीर को गहरा ओर फिर कुछ सोचने के बाद कहा कि “ अच्छा क्या तुम मुझे इसे पहनकर दिखा सकती हो, क्योकि मुझे देखना है कि यह साइज तुम्हे फिट बैठ रहा है, या नही? तभी मैने मना करते हुए कहा कि “ नही मैं इसे अभी कैसे पहन सकती हूं यहां पर मुझे अच्छा नही लगेगा”। तभी आशीष ने जवाब देते हुए कहा “अरे तो इसमें गलत क्या है? यहां पर तुम्हारी जरूरत का सभी सामान मौजूद है। आशीष ने पहले मुझे नहाने के लिए कहा और फिर जल्दी से अपनी ड्रेस को बदलने ने के लिए जोर दिया, ओर उसके इतना कहने पर मैं भी वह ड्रेस पहनने के लिए मान गयी थी। मैं जिस कमरे मैं नहा रही थी, वो जालियों से बना हुआ कमरा था। इस वजह से आशीष की आंखें इस दौरान मेरे नग्न शरीर को परखने में लगी हुई थी। कुछ ही देर बाद मैं नहा धोकर ओर ड्रेस पहन कर आशीष के सामने आ चुकी थी। उस ड्रेस के अंदर मैं काफी हॉट माल लग रही थी और इसी वजह से आशीष की नजरें मुझसे हटने का नाम ही नही ले रही थी। पहले यो आशीष ने मेरे फिगर की तरफ की ओर फिर मुझे मेकअप वाले एक कमरे की तरफ लेकर चला गया था। आशीष ने पहले मुझे आईने के सामने बैठाया ओर फिर उसने लिपिस्टिक ओर मेकअप कर के मुझे पूरी तरह से चमका दिया था। मुझे खुदको देखकर यकीन ही नही हो रहा था कि मैं एक गांव की लड़की हूँ। मैं बिल्कुल किसी अप्सरा की तरह दिख रही थी। अब आशीष ने मुझे बैडरूम की तरफ चलने के लिए कहा और फिर मैं खुशी-खुशी बिना कुछ सोचे उसके साथ बैडरूम में चली गयी थी। कुछ देर तो हम बैड पर बात करते रहे और फिर अचानक से ही आशीष ने मेरी स्कर्ट में हाथ डालकर मेरी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया था। मैं भी अपनी आंखें बंद कर के वासना के अंदर पूरी तरह से डूब चुकी थी। इसी दौरान आशीष ने मेरे होंठ पर होंठ रखकर मुझे चूमना भी शुरू कर दिया था। कुछ देर तक तो हम ऐसे ही एक दूसरे को फ्रेंच किस करते रहे और फिर आशीष न मेरे बाकी अंग जैसे बूब्स के ऊपर ओर गाल के नीचे साथ ही गले पर चूमकर मुझे उत्तेजित करना शुरू कर दिया था। अब मेने भी खुद को पूरी तरह से खुद को आशीष को ही सौप दिया था। अब आशीष ने मेरी टॉप को धीरे से खींचकर उतार फेंका था। मुझे काफी अजीब लग रहा था, क्योकि अब मैं आशीष के सामने केवल ब्रा ओर स्कर्ट में ही मौजूद थी। अब आशीष ने मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दबाते हुए मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया था। उसके इस तरह से बूब्स दबाने से मेरा एक बूब ब्रा से उछलकर बाहर आ गया था। यह दृश्य देखकर आशीष का लन्ड पेंट में से ही सलामी देने लग गया था। अब आशीष ने मेरी ब्रा को खोलकर मुझे उपर की तरफ़ से पूरी तरह नंगा कर दिया था। अब वह गर्मी के मौसम में बिल्कुल आम की तरह मेरे बूब्स को चूसते ही जा रहा था। इस दौरान मेरी सांसे तेज हो गयी थी, ओर मेरे मुंह से तेज सिसकारियों की आवाजें निकल रही थी। अब मैं भी चुदने  के लिए पूरी तरह से तैयार हो गयी थी। मेने भी तुरन्त आशीष की शर्ट को उतारकर जमीन पर फेंक दिया था। अब मेने उसके दमदार शरीर पर चुम्बन की बरसात करना शुरू कर दिया था। कुछ ही देर मेने उसकी पेंट को उतार कर उसके 7 इंच के लन्ड को भी पेंट से बाहर निकाल दिया था। पहले तो इन उसके चेहरे को देखते हुए कुछ देर तक उसके लंड को सहलाया ओर फिर एक ही बार मे उसके पूरे लन्ड को अपने मुंह मे पूरी तरह से गले मे उतार लिया था। कुछ ही देर में मैने उसके लन्ड को भिगाकर गीला कर दिया था। अब तक आशीष भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था। कुछ ही देर में आशीष ने मुझे पहले तो बैड पर लेटाया ओर फिर मेरी स्कर्ट को उपर करते हुए मेरी पेंटी को खींचकर निकाल फेंका था। उसने पहले तो मेरी स्कर्ट को उपर उठाया और फिर मेरी नंगी चुत पर चूमना शुरू कर दिया था। आशीष ने कुछ ही देर में उसकी जीभ को मेरी चुत के बिल्कुल बीच मे डाल दिया था, ओर मेरी चुत का चाटना शुरू कर दिया था। उसके चुत चाटने के कारण मेरे मुंह से हल्की-हल्की आह आह की आवाजें निकलना शुरू हो गयी थी। मेरी इस तरह की आवाजें आशीष को ओर भी ज्यादा उत्तेजित करने लग गयी थी। कुछ ही देर बाद आशीष ने मुझे घोड़ी बनाकर बैड पर बैठा दिया था। इसके बाद आशीष ने पीछे से मेरी स्कर्ट को ऊपर करते हुए मेरी चुत का घूंघट हटा दिया था। अब आशीष अगली कार्रवाई के लिए पूरी तरह से तैयार हो रहा था। अब आशीष अपने सीधे हाथ से मेरी चुत में उंगली करते हुए अपने हाथों से ही मेरी चुत को चोद रहा था। इस दौरान वह अपने दूसरे हाथ से अपने लंबे चौड़े लन्ड को भी मसल रहा था। आशीष के उंगली से चौदने की रफ्तार इतनी तेज थी कि कुछ ही देर में उसने मेरी चीखें निकाल दी थी। मुझे यह भी पता नही चला कि कब मेरी चुत में से पानी निकलना शुरू हो गया था। अब मैं ओर भी ज्यादा चुदासी होती जा रही थी और साथ ही आशीष की भी उत्तेजना धीरे-धीरे तेज होती जा रही थी। कुछ ही देर में आशीष ने अपने लंड को सहलाया ओर फिर अपने लंड को मेरी चुत की दीवार पर पे ले जाकर रख दिया था। अब आशीष का लन्ड लगातार मेरी चुत के बीज से रगड़ खा रहा था। कुछ ही देर में आशीष ने एक ही झटके में अपने लन्ड को मेरी चुत में उतार दिया था। इस अचानक की कार्रवाई से दर्द के कारण मैं एक दम से झटपटा गई थी, जिस वजह से आशीष का लन्ड फिर से मेरी चुत से बाहर निकल गया था। मुझे तेज दर्द हो रहा था, जिस वजह से मेरे आंसू ही बाहर आ गए थे। इस वजह से मैने आशीष से कहा कि प्लीज अगली बार थोड़ा धीरे से डालना।।।।। अब आशीष ने फिर से अपने लंड को तानते हुए उसे मेरी चुत की दीवार पर ले जाकर रख दिया था। अब आशीष ने सिर्फ टोपे तक ही अपने लंड को मेरी चुत के अंदर घुसेड़ दिया था। अब वह बस धीरे-धीरे टोपे तक ही मेरी चुत में अपने लन्ड को अंदर बाहर कर रहा था। इस दौरान में तेज सिसकारियों के साथ अपनी उंगलियों से लगातार अपनी चुत के बीज को रगड़ रही थी। कुछ ही देर में आशीष ने अपने पूरे लन्ड को मेरी चुत में घुसाकर मुझे चोदना शुरू कर दिया था। आशीष का लन्ड पूरी रफ्तार से मेरी चुत को चीरता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था। इस दौरान में चीखते हुए दो बार अपना पानी निकाल चुकी थी। उस दिन आशीष ने करीब दो बार मुझसे जमकर चुदाई की थी, ओर फिर अगले दिन आशीष फिर से अपने घर के लिए निकल गया था। मैं समझ गयी थी कि आशीष ने सिर्फ चुदाई के लिए ही मुझसे सम्बन्ध बनाये थे। दोस्तों अगर आपको मेरी यह कहानी पसन्द आयी हो तो इसे जितना हो सकें शेयर करें और ऐसी ही मजेदार कहानियों के लिए हमारी वेबसाइट पर बने रहिए :’) Resource : http://ristokikahaniya.com/ek-ladake-ne-mujhe-pyaar-mein-phansaaya/

 
 
 

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